छत्तीसगढ़
केवीके बेमेतरा में 60 से अधिक किसानों को दी गई उन्नत तकनीकों की जानकारी
Shantanu Roy
16 March 2026 11:25 PM IST

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Bemetra. बेमेतरा। प्रदेश में तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा अलसी फसल के विपुल उत्पादन और उसके मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) बेमेतरा द्वारा कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय समन्वित अलसी अनुसंधान परियोजना, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा कृषि विभाग बेमेतरा के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विकासखंड बेमेतरा के चयनित ग्रामों में अलसी की उन्नत किस्मों का किसानों के प्रक्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (फ्रंट लाइन डेमो) संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को अलसी फसल के वैज्ञानिक उत्पादन, प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. संदीप भंडारकर, अधिष्ठाता, रेवेन्द्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र ढोलिया, डॉ. संजय द्विवेदी, प्रमुख वैज्ञानिक (सस्यविज्ञान), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, डॉ. टी.डी. साहू, सह प्राध्यापक, डॉ. साक्षी बजाज, सहायक प्राध्यापक, डॉ. राजेश एक्का, कीट वैज्ञानिक तथा तोषण कुमार ठाकुर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संदीप भंडारकर ने देश में तिलहनी फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को उन्नत किस्मों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तिलहनी फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ाकर देश में खाद्य तेल के आयात को कम किया जा सकता है तथा भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं डॉ. संजय द्विवेदी ने अलसी के पौष्टिक गुणों तथा उसके वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अलसी एक ऐसी तिलहनी फसल है जिसे अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए किसानों को धान की खेती के विकल्प के रूप में भी अलसी की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे इसके क्षेत्रफल में वृद्धि हो सके और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त हो।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. साक्षी बजाज ने अलसी फसल में खरपतवार नियंत्रण की तकनीकों के बारे में जानकारी दी, जबकि डॉ. राजेश एक्का ने कीट प्रबंधन से संबंधित उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। वहीं डॉ. टी.डी. साहू ने अलसी के मूल्य संवर्धित उत्पादों तथा अलसी के रेशे से हैंडलूम उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं के बारे में किसानों को बताया। कार्यक्रम में केवीके बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण कुमार ठाकुर ने अलसी फसल के प्रदर्शन कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि फसल चक्र अपनाने से न केवल मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि फसलों में रोग एवं कीट प्रकोप की संभावना भी कम हो जाती है और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
कार्यक्रम के बाद विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. संजय द्विवेदी के नेतृत्व में लाभान्वित किसानों के प्रक्षेत्रों का भ्रमण एवं निरीक्षण भी किया गया। इस दौरान निरीक्षण दल में वैज्ञानिक डोमन सिंह टेकाम, डॉ. राजेश एक्का तथा क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी राजेश कुमार टंडन भी शामिल रहे। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. जितेन्द्र जोशी, डॉ. लव कुमार, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वी.के. टंडन सहित जिले के 60 से अधिक किसान उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को अलसी की उन्नत खेती, उत्पादन तकनीक तथा मूल्य संवर्धन की जानकारी प्राप्त हुई, जिससे भविष्य में जिले में तिलहनी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
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